April 4, 2025

कैलाश विजयवर्गीय राजनीति के शिकार

किशोर सिंह
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार

इंदौर / भोपाल

शहर इंदौर से राजनीति सफर तय कर केंद्र में पंहुचे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी सत्ताधारी पार्टी के अंतरकलह ओर गुटबाजी का शिकार होते आ रहे है। फिलहाल उन्हें वर्तमान में पश्चिम बंगाल के प्रभार से मुक्त कर आगामी कमान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को सोप दी गई है। जो मेरी नजर में अनुचित है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव को जिस प्रकार पश्चिम बंगाल से बेदखल किया गया वह बेहद निंदनीय है। केंद्र में सत्ताधारी पार्टी को उक्त विषय पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। जिस व्यक्तित्व ने अपना सम्पूर्ण जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया। जो संगठन के निर्देश पर अंधेरे में मोमबत्ती लेकर पश्चिम बंगाल की सरजमीं पर भारतीय जनता पार्टी का झंडा लहरा आया, यह हर किसी के बस की बात नही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने भी संबोधन के दौरान कहा था कि बंगाल में कैलाश विजयवर्गीय ने टीएमसी के शीर्ष नेताओं को नींद हराम कर रखी है। ऐसे में पश्चिम बंगाल से विजयवर्गीय को बेदखल किस उद्द्देश्य को लेकर किया गया, यह समझ से परे है। लेकिन यह जरुर समझ आ रहा है कि सजी-सजाई थाली अब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को परोस दी गई है। इसके पीछे का उद्द्देश्य राजनीति में बढ़ता कद भी हो सकता है। जो अन्य शीर्ष नेताओं को रास नही आया।

पश्चिम बंगाल की बंजर जमी पर भाजपा को शत प्रतिशत मजबूत करने में कैलाश एंड पार्टी का योगदान रहा। जहां भाजपा के शीर्ष नेताओं सहित कार्यकर्ताओ को सदैव जान-माल ओर मौत का सांया मंडराता रहा। यहां तक कि लगातार जानलेवा हमले भी हुएं ओर जाने भी गई। विजयवर्गीय के अथक प्रयास से पश्चिम बंगाल अब भय मुक्त होते जा रहा है। अब तो बोई गई फसल को अब कोई और नेता काटने आएगा ओर कम मेहनत में नजरो में चढ़ जाएगा।

बढ़ते कद को रोकने के लिए सबसे पहले मध्यप्रदेश से बिदाई कराई गई। जिसके पीछे संगठित दल ने केंद्र से गुहार लगाई थी जो सहर्ष स्वीकार की गई और बना दिया गया राष्ट्रीय महासचिव लेकिन अब तक केन्द्रीय मंत्री की शपथ नही दिलाई गई। अब तो लगता है विजयवर्गीय को भाजपा की बंजरभूमि पर हल जोतने के लिए रखा गया है। आगे भी हल जोतने के लिए नई जगह के लिए निर्णय लिया जाना शेष है।

किशोर सिंह
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
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