April 4, 2025

स्टेट प्रेस क्लब के ‘रूबरू” कार्यक्रम में वरिष्ठ गायिका सुश्री कलापिनी कोमकली का हुआ सम्मान

संगीत में विचार को दृढ़ता से प्रधान बनाया पं. कुमार गंधर्व ने, ये संगीत को उनकी देन: कलापिनी कोमकली

इंदौर। कुमार जी संगीत में विचार होना चाहिए, इस पर दृढ़ रहे। गुरु के अंधानुकरण की परिपाटी के वे पक्षधर नहीं थे। गुरु तो गुरु हैं ही, लेकिन शिष्य का भी तो अपना व्यक्तित्व है। इस बात को आज से साठ बरस पहले कहना बड़ी हिम्मत की बात थी।”

यह बात वरिष्ठ गायिका सुश्री कलापिनी कोमकली ने स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित रूबरू कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कही। हाल ही में संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरुस्कार ग्रहण करने पर उन्होंने कहा कि इस पुरुस्कार के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं। अपने पिता और गुरु पंडित कुमार गंधर्व जी के जन्मशती समारोह के आयोजनों को पूरे देश में आयोजित कर रहीं सुश्री कलापिनी कोमकली ने बताया कि इस प्रसंग के लिए वे पिछले अनेक वर्षों से योजना बना रही थीं तथा कुमार जी के अलहदा व्यक्तित्व के अनुरूप इसके आयोजनों में सिर्फ कुमारजी के शिष्यों को नहीं जोड़ा गया बल्कि सभी घरानों के श्रेष्ठ गायकों को जोड़ा गया। यूं भी पंडित कुमार गंधर्व जी कहते थे कि हमें सभी घरानों की अच्छी बातों को आत्मसात करना चाहिए। कुमारजी केवल शिष्य तैयार करने वाली फैक्ट्री नहीं थे बल्कि कलाकार और कलाप्रेम गढ़ते थे। कुमारजी को विद्रोही कलाकार कहा जाता था लेकिन उनके विद्रोह का स्वरूप संगीत के मूल शास्त्र या स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की। उसी सरगम, आरोह अवरोह और चलन के बाद भी केवल उनके अपने विचार के कारण कुमार जी का गायन अलग नज़र आता था। कुमारजी कहते थे कि हमारा कोई मित्र यदि जा रहा हो तो क्या हम उसे सीधे या साइड से देखकर नहीं पहचानेंगे ? इसी तरह राग मित्र की तरह हैं। कुमार जी रागों को आत्मसात कर चुके थे, इसलिए। शताब्दी वर्ष में इसीलिए कुमार जी संगीत जगत में आच्छादित हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि कुमारजी के जन्मशती वर्ष में नई पीढ़ी को कुमारजी की विशेषताएं बताने के लिए तीन पुस्तकें प्रकाशित की गईं हैं जिनमें QR कोड स्कैन करने पर संबंधित बंदिश या भजन के बजने के प्रयोग भी शामिल हैं। कुमार जी को सख्त गुरु बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए भी गाना आसान नहीं था क्योंकि कुमारजी की सुपुत्री होने के कारण सुनने वालों की अपेक्षाएं बहुत ऊंची थीं। कुमारजी के इंदौर से जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संक्रामक बीमारी के कारण रामू भैया दाते की धर्मपत्नी डरती थी कि उनके उस समय छोटे बच्चे अरुण बीमार ना हो जाए और तब रामू भैया ने कहा था कि कुमार गंधर्व वह हस्ती है कि एक कुमार के लिए दस अरुण कुर्बान हैं। इंदौर कुमार जी का दूसरा घर था और अपनी शारीरिक तकलीफों के संघर्ष के दिनों में ही वे कबीर से गहरे जुड़ गए। एक छोटी सी चिड़िया की लगातार चहचहाहट से नींद खराब होने के बाद उनके मन में विचार आया कि इतनी छोटी सी चिड़िया के फेफड़ों में इतनी जान है तो मैं तो फिर इंसान हूं, और यहीं से उनके कलाकार के जिजीविषा को बल मिला।

सुश्री कलापिनी कोमकली का स्टेट प्रेस क्लब, मप्र और अभिनव कला समाज की ओर से सम्मान अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार खारीवाल, वरिष्ठ कलाकार सर्वश्री दीपक गरुड़, पं.सुनील मसूरकर, सत्यकाम शास्त्री, सुश्री पूर्वी निमगांवकर,अभिषेक गावड़े, सुदेश गुप्ता,राजेंद्र कोपरगांवकर, पंकज क्षीरसागर, जयवंत शिंदे, रुखसाना मिर्ज़ा, रंगकर्मी रवि महाशब्दे, संदेश व्यास, सुश्री सिया व्यास, आकाशवाणी इंदौर के श्री संतोष अग्निहोत्री, वरिष्ठ फोटोग्राफर श्री तनवीर फारूकी एवं समाजसेवी श्री अनिल त्रिवेदी ने किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन बहुविध संस्कृतिकर्मी एवं पत्रकार आलोक बाजपेयी ने किया। अंत में सुश्री कोमकली को स्मृति चिन्ह श्री प्रवीण कुमार खारीवाल एवं देवास के वरिष्ठ पत्रकार श्री मोहन वर्मा ने प्रदान किया। क्लब के प्रकाशन श्रीमती मीना राणा शाह, जयश्री पिंगले एवं रुखसाना मिर्ज़ा ने भेंट किए। अंत में आभार प्रदर्शन श्री प्रवीण कुमार खारीवाल ने किया।